Debashish's Defection: Growing unrest within BJD and weakening Opposition

वरिष्ठ नेता देबाशीष सामंतराय का बीजेडी छोड़कर भाजपा में शामिल होना ओडिशा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। ममता महंत और सुजीत कुमार के बाद एक और वरिष्ठ नेता का भाजपा में जाना यह संकेत देता है कि बीजेडी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। राज्यसभा में बीजेडी की संख्या घटकर पांच रह जाना भी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक और प्रतीकात्मक झटका माना जा रहा है।

भाजपा में शामिल होते ही देबाशीष ने वी.के. पांडियन पर खुलकर हमला बोला। उनका आरोप था कि पार्टी में बढ़ते केंद्रीकरण और कुछ लोगों के अत्यधिक प्रभाव ने पुराने नेताओं को हाशिए पर धकेल दिया। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन में संवाद और सामूहिक नेतृत्व की जगह सीमित दायरे में फैसले लिए जाने लगे थे। राजनीतिक हलकों में इसे बीजेडी के भीतर लंबे समय से चल रही नाराजगी का खुला विस्फोट माना जा रहा है।

इस बीच ओडिशा कानून-व्यवस्था, बिजली संकट, बेरोजगारी, सीमावर्ती विवाद और प्रशासनिक चुनौतियों जैसे कई गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। बीजेडी इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश जरूर कर रही है और जमीनी स्तर पर कुछ सक्रियता भी दिख रही है, लेकिन विपक्ष के रूप में उसकी आवाज अब भी पूरी तरह प्रभावी नहीं दिखती। लगातार इस्तीफे, अंदरूनी असंतोष और संगठनात्मक कमजोरी ने यह धारणा मजबूत की है कि पार्टी फिलहाल अपनी ही राजनीतिक चुनौतियों से घिरी हुई है।

By Nirvay

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *