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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार ईद-उल-अज़हा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और प्रशासनिक संदेश का भी केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मायापुर स्थित ISKCON मंदिर की गौशाला में जाकर गौ-पूजा की और गायों की सेवा कर एक स्पष्ट राजनीतिक और सामाजिक संकेत दिया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पहले ही बकरीद पर गौ-हत्या पर रोक लगाने और सार्वजनिक सड़कों पर नमाज़ पर प्रतिबंध जैसे निर्णय ले चुकी है।

पिछले वर्षों में कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज़ और उसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति एक राजनीतिक प्रतीक बन चुकी थी। लेकिन इस वर्ष नमाज़ को ब्रिगेड ग्राउंड में स्थानांतरित किया गया, जिसे प्रशासनिक अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।

सुवेंदु अधिकारी की राजनीति अब “तुष्टिकरण” के विरुद्ध “संतुलित सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” का संदेश देने की कोशिश करती दिख रही है। गौ-पूजा और धार्मिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था पर जोर देकर उन्होंने अपने समर्थकों को यह संकेत दिया है कि राज्य की नीतियां अब कानून, संस्कृति और प्रशासनिक अनुशासन के आधार पर तय होंगी।

यह बदलाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा सकता है।

By Nirvay

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