सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग करने वाले किसी भी अंतरिम आदेश को पारित करने से इनकार कर दिया । उन पर आरोप था कि उन्होंने भारत के चुनाव आयोग में अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए । इसके बजाय, कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। इसमें उस याचिका पर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है जिसमें CEC कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग के उस तरीके को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लिए गए थे । भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर याचिका में लगाए गए आरोपों पर जवाब मांगा । कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर चुनाव आयोग का जवाब देखने के बाद उसे पता चलता है कि फैसले जरूरी आम सहमति के बिना लिए गए थे, तो वह CEC द्वारा लिए गए फैसलों पर पुनर्विचार कर सकता है । शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उसने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है । CJI की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्वाचन आयोग ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि कुछ राज्यों में चल रहे एसआईआर के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ जोड़ा गया नया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर किया गया है । सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट यह पता लगाने के लिए रिकॉर्ड की जांच करना चाहता है कि बदलाव किसने किए थे । Post navigation Student Union Polls in Odisha: ଛାତ୍ର ସଂସଦ ନିର୍ବାଚନ ଘୋଷଣାକୁ ବିଜୁ ଛାତ୍ର ଜନତା ଦଳର ସ୍ୱାଗତ, ତରବରିଆ ଘୋଷଣାକୁ ନେଇ ପ୍ରଶ୍ନ Nobel Prize 2026 in Medicine Announced: Trio Wins for Optogenetics Work