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पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने अवैध अतिक्रमण, गैरकानूनी निर्माण और कथित सिंडिकेट नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया है। कोलकाता, हावड़ा, टॉपसिया, तिलजला और आसपास के कई संवेदनशील इलाकों में प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है।

सरकार का कहना है कि हाल के अग्निकांडों, अवैध फैक्ट्रियों, बिना अनुमति बने गोदामों और खतरनाक निर्माणों ने लोगों की जान जोखिम में डाल दी थी। इसी के बाद प्रशासन ने अवैध कब्जों और नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए ढांचों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की। कई इलाकों में अवैध बिजली कनेक्शन, अवैध गैस भंडारण और कथित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

हालांकि कार्रवाई के दौरान कई जगहों पर भारी विरोध देखने को मिला। कुछ इलाकों में स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पथराव, आगजनी और सड़क जाम की घटनाओं के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कई लोगों को हिरासत में लिया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में रैपिड एक्शन फोर्स और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

राज्य पुलिस ने दावा किया है कि हिंसा भड़काने, अवैध कब्जों को संरक्षण देने और प्रशासनिक कार्रवाई में बाधा डालने वाले कई कथित सिंडिकेट संचालकों और असामाजिक तत्वों की पहचान की गई है। कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभियान को “गरीबों, अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के खिलाफ सरकारी दमन” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बुलडोजर राजनीति के जरिए भय और असुरक्षा का माहौल बना रही है। तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के गरीबों के घर और छोटे कारोबार तोड़े जा रहे हैं।

इसके जवाब में भाजपा सरकार ने कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और अवैध कब्जों, जमीन माफियाओं तथा आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ अभियान किसी भी दबाव में नहीं रुकेगा। सरकार इसे “कानून व्यवस्था बहाली और शहरी सुधार” का हिस्सा बता रही है।

बंगाल में यह बुलडोजर कार्रवाई अब सिर्फ प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष बनती जा रही है।

By Nirvay

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