राज्य के बाहर ओडिया प्रवासी मज़दूरों की बार-बार हो रही मौतें ओडिशा के अनसुलझे “दादन” संकट की एक दुखद याद दिलाती हैं । केन्दुझार खनिजों से भरपूर ज़िला है और यहाँ रोज़गार की अपार संभावनाएँ हैं । तब भी महिलाओं और बच्चों समेत सैकड़ों मज़दूर काम की तलाश में दूसरे राज्यों जा रहे हैं । तमिलनाडु की एक सीफ़ूड प्रोसेसिंग फ़ैक्टरी में अमोनिया गैस के रिसाव से केन्दुझर की 7 बच्चियों की मौत हो गई और कई अन्य प्रभावित हुईं है । वे सभी बच्चिया थे । प्रवासी मज़दूरों के तौर पर गरीब आदिवासी, महिलाएँ और नाबालिक सबसे ज़्यादा परेशानियाँ झेल रहे हैं। जब तक कोई बड़ी त्रासदी नहीं होती, तब तक उनकी तकलीफ़ों पर शायद ही कभी लगातार ध्यान दिया जाता है । दादन प्रणाली मज़दूरों को क़र्ज़ और पलायन के जाल में बाँध रही है । कई ज़िलों में ठेकेदारों के शोषण से उनकी ज़िंदगी गुलामी जैसी हो गई है । यह एक चेतावनी है । बच्चों के मजबूरी में पलायन को रोकने के लिए सरकार को अभी कदम उठाने होंगे। लड़कियों और बच्चों को दूसरे राज्यों में प्रवासी मज़दूर के तौर पर काम करने नहीं जाना चाहिए । ओडिशा सरकार को मुआवज़े से आगे बढ़कर रोज़गार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना होगा । हमारे खनिजों से हमारे लोगों के लिए रोज़गार पैदा होना चाहिए । हर बच्चा सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान का हकदार है । हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए । उनसे अपना बचपन नहीं छीन ना चाहिए । Post navigation Puri Residents to Get Special Darshan: ମହାପ୍ରଭୁଙ୍କ ଦର୍ଶନ ହେବ ସହଜ; ଆଧାର ଦେଖାଇ ସିଧା ଶ୍ରୀମନ୍ଦିର ଭିତରକୁ ପ୍ରବେଶ କରିବେ ପୁରୀବାସୀ Three From Odisha Honoured With Padma Shri: ପଦ୍ମଶ୍ରୀ ସମ୍ମାନରେ ସମ୍ମାନିତ ହେଲେ ୩ ଓଡ଼ିଆ