प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘सेवा तीर्थ’ में भारत सरकार के सचिवों के साथ बातचीत की।
 
‘सेवा तीर्थ’ में हुई चार घंटे की इस बैठक में कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, सैन्य मामलों के विभाग के सचिव और प्रमुख मंत्रालयों व विभागों के सचिव शामिल हुए।
 
बातचीत मुख्य रूप से दो विषयों पर केंद्रित थी। पहला विषय था ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार में आसानी) और ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ (जीवन में आसानी) के लिए डीरेगुलेशन और अन्य सुधार; जबकि दूसरा विषय था ‘आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना’।
 
बातचीत के दौरान, सचिवों ने इन दो मुख्य विषयों के अनुरूप अपने मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख कदमों की जानकारी दी।
 
उन्होंने प्रधानमंत्री के विज़न को ठोस नतीजों में बदलने के लिए चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला, साथ ही सेक्टर-विशिष्ट चुनौतियों पर चर्चा की और गवर्नेंस व सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए अपनी भविष्य की रणनीतियों की रूपरेखा भी बताई।
 
प्रधानमंत्री ने ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ (पूरी सरकार को एक इकाई के रूप में देखने वाले) दृष्टिकोण को अपनाने और विभागीय बाधाओं (साइलो) को खत्म करने के महत्व पर ज़ोर दिया। एकीकृत योजना और समन्वय के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने विभागों के बीच समन्वय और सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में ‘पीएम गतिशक्ति’ के व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित किया।
 
प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि वे योजनाओं का लोगों के जीवन पर पड़ने वाले ठोस असर पर ध्यान दें ।

By Nirvay

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