NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर राजनीतिक और नैतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष और छात्र संगठनों का सवाल है कि जब बार-बार राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, तो आखिर जवाबदेही कौन तय करेगा। आलोचकों का कहना है कि लाखों छात्रों ने वर्षों की मेहनत, मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ झेलकर परीक्षा की तैयारी की, लेकिन सिस्टम की विफलता ने उनके भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया। पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बावजूद मंत्री पद पर बने रहना विपक्ष के निशाने पर है। हालांकि सरकार का तर्क है कि जांच जारी है, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। भाजपा नेतृत्व फिलहाल इसे प्रशासनिक विफलता मान रहा है, व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं। लेकिन सार्वजनिक धारणा में यह मुद्दा केवल तकनीकी गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा। यह शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और राजनीतिक जवाबदेही का सवाल बन चुका है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या केवल जांच पर्याप्त है, या नैतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। Post navigation PM Modi’s UAE Visit: Major MoUs on LPG, Petroleum reserves signed ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी क्यों बनी जरूरी?