केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगातार सामने आ रहे NEET परीक्षा विवादों के कारण गंभीर राजनीतिक और नैतिक दबाव में दिखाई दे रहे हैं। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के आरोपों ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर बार-बार गड़बड़ियां, तकनीकी खामियां, पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन की विफलताएं सामने आती रही हैं। हर बार छात्रों और अभिभावकों को आश्वासन तो मिला, लेकिन व्यवस्था में ठोस सुधार नजर नहीं आया। अब लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा रद्द होने के बाद विपक्ष सीधे धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की गोपनीयता और निष्पक्षता सुरक्षित नहीं रह सकती, तो फिर शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा। छात्रों की वर्षों की मेहनत और मानसिक दबाव के बीच सरकार की विफलता ने जनता के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। यह केवल प्रशासनिक संकट नहीं, बल्कि साख का भी संकट बन चुका है। अब शिक्षा मंत्रालय के सामने केवल जांच नहीं, बल्कि विश्वास बहाली की सबसे बड़ी चुनौती है। Post navigation Naveen Patnaik slams Centre after NEET UG 2026 cancellation