नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, गुरुवार, 3 सितंबर को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके 14 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किए गए । तिब्बत में यह भूकंप भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 1:46 बजे आया। यह भूकंप तिब्बत-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने की घटना के ठीक एक हफ़्ते बाद आया है, जिसमें बर्फ़, चट्टानों, कीचड़ और पानी का भारी सैलाब आया था और सीमा के दोनों ओर बस्तियों और घाटियों में भारी तबाही मची थी। गुरुवार को मिले ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में कम से कम 1,268 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,200 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं। चीन ने 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की सूचना दी थी, जिनमें 261 विदेशी शामिल थे । हिमालय में ग्लेशियर के ढहने से चट्टानें, बर्फ़ और पिघला हुआ पानी नीचे की घाटियों में आ गया, जिससे बाढ़ शुरू हो गई। इसके कारण तिब्बत और नेपाल से होकर बहने वाली नदियों में पानी का बहाव तेज़ी से बढ़ गया और घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को बहा ले गया। इस आपदा ने नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों में समुदायों को भारी तबाही का सामना करने पर मजबूर कर दिया है।नेपाल-चीन सीमा के पास बचाव दल की टीमें कीचड़, चट्टानों और मलबे के बीच तलाशी अभियान चला रही हैं । Post navigation Assistant Drugs Controller Nabbed by Vigilance:୬ ହଜାର ଟଙ୍କା ଲାଞ୍ଚ ନେଉଥିବା ବେଳେ ଧରାପଡ଼ିଲେ ଯାଜପୁର ସହକାରୀ ଡ୍ରଗ୍ସ କଣ୍ଟ୍ରୋଲର भारत और बेल्जियम अगले 5 सालों में द्विपक्षीय ब्यापार दोगुना करने का लक्ष्य