ISRO ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अपना अगली पीढ़ी का नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च किया। यह सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च व्हीकल से अलग हो गया और इसे इसके निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया गया। यह सैटेलाइट ISRO की अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि इस सफल लॉन्च के साथ ही ‘नाविक’ (NavIC) कॉन्स्टेलेशन (उपग्रह समूह) फिर से अपने न्यूनतम परिचालन स्तर—यानी चार उपग्रहों—पर आ गया है। लॉन्च के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, नारायणन ने बताया कि 2,250 किलोग्राम वजनी इस सैटेलाइट को GSLV-F18 रॉकेट ने बिल्कुल सटीक तरीके से इसकी निर्धारित अंडाकार कक्षा (elliptical orbit) में स्थापित किया है। उन्होंने GSLV मिशनों के बीच 56 दिनों के ‘टर्नअराउंड टाइम’ (एक मिशन के बाद दूसरे मिशन की तैयारी में लगने वाला समय) का भी जिक्र किया और बताया कि यह अब तक का सबसे कम समय अंतराल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को भारत के अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को ले जाने वाले GSLV-F18 रॉकेट के सफल लॉन्च पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, ‘नाविक’ (NavIC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Post navigation Ganjam Flood Crisis: ବାତ୍ୟା ଅର୍ଣ୍ଣବ ପ୍ରଭାବ: ଗଞ୍ଜାମରେ ବନ୍ୟା ବିପର୍ଯ୍ୟୟକୁ ନେଇ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ ଘେରିଲା କଂଗ୍ରେସ Cyclone Aftermath: ଆସିକାରେ ବାତ୍ୟା ପରବର୍ତ୍ତୀ ରିଲିଫ୍ ଓ ପୁନରୁଦ୍ଧାର କାର୍ଯ୍ୟ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ, ସ୍ୱାଭାବିକ ହେଉଛି ଯାତାୟାତ