US सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला एक बड़ा बिल पास किया है। इससे भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान से होने वाले इंपोर्ट पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है। ये देश रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार हैं। इस बिल का मकसद उन देशों पर दबाव बढ़ाना है जो मॉस्को से एनर्जी खरीदते रहते हैं और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए मजबूर करना है । 86-11 के भारी बहुमत से पास हुआ यह कानून, रूस की एनर्जी से होने वाली कमाई को रोकने की वॉशिंगटन की कोशिशों में एक अहम कदम है। अगली मंजूरी के लिए 31 तारीख को बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स जाएगा । जबसे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण मॉस्को का एनर्जी एक्सपोर्ट पारंपरिक यूरोपीय बाज़ारों से हटकर दूसरी जगहों पर गया है, तबसे भारत रूसी कच्चे तेल (क्रूड) के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक बनकर उभरा है। इसलिए, US का प्रस्तावित कानून भारत की रूसी तेल रणनीति पर जियोपॉलिटिकल और ट्रेड से जुड़ा नया दबाव डालता है। टैरिफ़ फिर से लगने का खतरा ऐसे समय में आया है जब भारत की रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेज़ी आई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि US-इजरायली मिलिट्री हमलों के जवाब में ईरान की कार्रवाई के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग में रुकावट आई, जिससे खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई रुक गई। पहले भारत के तेल इंपोर्ट का लगभग 40% हिस्सा यहीं से आता था। सप्लाई रुकने के कारण रिफाइनरियों को मुख्य विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल का रुख करना पड़ा। यह नया बिल ऐसे समय में भी आया है जब दोनों पक्ष ट्रेड बातचीत में लगे हुए हैं। Post navigation Heavy Rain Alert In Mayurbhanj: ମୟୂରଭଞ୍ଜ ଜିଲ୍ଲାରେ ଆଜି ସମସ୍ତ ସ୍କୁଲ ଛୁଟି, ପ୍ରବଳ ବର୍ଷା ଆଶଙ୍କା Single-Teacher School Crisis: ଜଣେ ଶିକ୍ଷକ ଥିବା ସ୍କୁଲରେ ତୁରନ୍ତ ଅତିରିକ୍ତ ଶିକ୍ଷକ ନିଯୁକ୍ତି ପାଇଁ ଗଣଶିକ୍ଷା ବିଭାଗର ନିର୍ଦ୍ଦେଶ