प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट में दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करते हुए शांति और “मानवता सबसे पहले” (Humanity First) के सिद्धांत पर ज़ोर दिया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता लोगों पर केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता देने वाले नज़रिए पर आधारित है । मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी हमारी प्राथमिकताएं रही हैं । मोदी ने अगले 20 सालों के लिए एक नए और बड़े लक्ष्य (एजेंडा) की बात कही और ब्रिक्स के अंदरूनी कामकाज के तरीकों को मज़बूत करके इस प्रक्रिया को शुरू करने पर ज़ोर दिया। पीएम मोदी ने “ट्रोइका” (Troika) सिस्टम के ज़रिए पहलों और नतीजों पर असरदार ढंग से आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक ‘ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र’ (BRICS Continuity and Implementation Mechanism) बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि रोडमैप तैयार करते समय तीन अहम पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए — प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाना। पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स “किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ते हैं ।” उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार में और देरी नहीं होनी चाहिए और बातचीत एक तय समय-सीमा के भीतर ठोस नतीजों के साथ पूरी होनी चाहिए। ग्लोबल इकोनॉमिक गवर्नेंस (वैश्विक आर्थिक कामकाज का प्रबंधन) पर पीएम मोदी ने कहा कि जो देश दुनिया की आर्थिक समृद्धि को आगे बढ़ा रहे हैं, उन्हें ग्लोबल इकोनॉमिक गवर्नेंस में भी सही भूमिका निभानी चाहिए। ग्लोबल ट्रेड में समुद्री नाविकों (seafarers) के योगदान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात में उन्हें अक्सर समय पर मदद नहीं मिल पाती है। उन्होंने संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और राजनयिक मिशनों को जोड़ने के लिए एक “नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क” (Seafarers Emergency Support Network) बनाने का प्रस्ताव रखा। पीएम मोदी के अनुसार, यह नेटवर्क संकट के अलर्ट साझा करने, परिवारों से बातचीत करने और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। Post navigation Odisha STF Team Returns from Digha: ବାଲେଶ୍ୱରରୁ ଓରାଙ୍ଗଉଟାନ ଉଦ୍ଧାର ଘଟଣା: ଦିଘାରୁ ଫେରିଲା STF ଟିମ୍