पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए पार्टी के नाम और उसके आधिकारिक प्रतीक चिन्ह के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है । पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले किसी भी गुट को 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों में पार्टी के नाम या चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं होगी । दोनों गुटों से कहा गया है कि वे नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे तक वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न जमा करें। खबरों के मुताबिक, रिताब्रता बनर्जी के कई विधायकों के साथ पार्टी छोड़ने के बाद विवाद बढ़ गया, जिससे पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच झगड़ा शुरू हो गया। TMC के 80 में से लगभग 60 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर रिताब्रता बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना। बाद में इस गुट ने अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस समूह को सदन में पार्टी की विधायी शाखा के रूप में और रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी है। जून में TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ में विलय की घोषणा की थी। यह समूह संसद के निचले सदन में NDA का समर्थन कर रहा है। चुनाव आयोग ने यह आदेश तब जारी किया जब विरोधी गुट गुरुवार को चुनाव आयोग के सामने पेश हुए; पांच दिनों से भी कम समय में यह उनकी दूसरी सुनवाई थी। चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पिछली मिसालों को देखते हुए, “दोनों विरोधी गुटों को समान स्थिति में रखने” के लिए किसी भी समूह को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के “फूल और घास” वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। Post navigation Co-operative Bank Scam: ଝାଡ଼ଖଣ୍ଡ ସମବାୟ ବ୍ୟାଙ୍କ ଘୋଟାଲା ମାମଲା: ଓଡ଼ିଶା ଓ ଝାଡ଼ଖଣ୍ଡର ୭ଟି ସ୍ଥାନରେ ଇଡିର ଚଢ଼ଉ Mohan-Aparajita Flight Dialogue: ମୋହନ-ଅପରାଜିତାଙ୍କ “ରୋଚକ ଆଲୋଚନା”